गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव आते हैं। ऐसा ही बदलाव गर्भवतियों के स्तन में भी आता है। शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिससे कभी कभी स्तनों में दर्द भी महसूस होता है। गर्भावस्था में स्तन काफी अधिक संवेदनशील हो जाते है जिससे उनपर छूने मात्र से ही दर्द महसूस हो जाता है।
प्रेगनेंसी में दर्द होने के कारण अनेक हो सकते हैं जो की निम्न हैं –
- भ्रुण के विकास के लिए शरीर में बहुत सारे परिवर्तन होते है। ऐसे में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन भी परिवर्तित होता है जिसके परिणाम स्वरूप गर्भवती के स्तन भारी हो जाते है और उन्हें दर्द महसूस होता है।
- गर्भावस्था में स्तनों का आकार भी बढ़ता है क्योंकि इस दौरान मिल्क डक्ट्स ( दूध बनने वाली कोशिका) का निर्माण होता है। प्रसव का समय पास आते आते स्तनों में भी भारीपन बढ़ता है और हल्के दर्द का अनुभव होता है।
- कभी कभी हार्मोनल बदलाव के कारण फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट नमक रोग हो सकता है। इसमें एक या दोनों स्तनों में गांठे बन जाती है। इस कारणवश स्तनों में पीड़ा का अनुभव हो सकता है।
- प्रेग्नेसी में कोलोस्ट्रम नाम का पदार्थ स्रावित होता जिसको फर्स्ट मिल्क आफ प्रेगनेंसी ( गर्भावस्था का पहला दूध) भी कहा जाता है। यह एंटीबॉडीज से युक्त होता है और शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। कोलोस्ट्रूम के स्रावित होने के कारण में स्तनों में दर्द हो सकता है।
यदि आपको स्तनों में पीड़ा अत्यधिक हो रही है तो उससे निजात पाने के लिए आप मालिश, व्यायाम या फिर अपने चिकत्सक ( स्त्री प्रसूति विषेज्ञ) के परामर्श से दवाएं ले सकती हैं।
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